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व्यवसाय क्या है /what is business in hindi

इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद आप ,

-व्यवसाय शुरू करने के लिये किन बातो का ध्यान रखना चाहिये।  
-व्यवसाय की विशेषता क्या है। 
-व्यवसाय , पेशा तथा रोजगार के असामान्य लक्षणों को समझ जायेगे। 
-व्यवसाय कितने प्रकार का होता है। 
-व्यवसाय के उदेश्यों को समझ जायेगे। 
-व्यवसाय में होने वाली हानि और उनके कारण क्या है।
            इस प्रकार के सभी सवालों के जवाब आपको मिल जाएंगे 


व्यवसाय क्या है ?
         व्यवसाय शब्द का अर्थ व्यस्त रहने से है। व्यवसाय एक आर्थिक क्रिया जिस के द्वारा वस्तु या सेवा प्रदान करके लाभ अर्जीत किया जाता है।

          एक व्यवसाय का उद्देश्य लोगो की आवश्यकताओं को पूरा कर के धन अर्जीत करना है वालमार्ट के संस्थापक सैम वॉल्ट्न  ने भी इसी नियम का इस्तमाल किया। जिस कारण वालमार्ट आज भी वर्ल्ड की सबसे बड़ी कम्पनी है।

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           व्यवसाय में विभिन्न प्रकार के कार्य हेतु विभिन्न प्रकार के संगठन कार्य करते है जिन्हे व्यवसायिक इकाई या फार्म कहा जाता है।  व्यवसाय को चलाने के लिये उद्यम (Enterprise) मुख्य रूप से चार प्रकार के कार्य करते है
1-वित्त व्यवस्था (Financial system)
2 -उत्पादन (The production)
3 -विपणन (Marketing)
4 - मानव संसाधन (Human resource)

          वित्त व्यवस्था (Financial system)- वित्त व्यवस्था का संबंध व्यवसाय के लिए धन इकठ्ठा करने और उसका सही उपयोग करने से है।
          उत्पादन (The production)- उत्पादन का अर्थ कच्चे माल से वस्तु का निर्माण करना या सेवाओं को उत्पन करना है।
          विपणन (Marketing)- विपणन से तात्पर्य उन सभी वस्तुओ और सेवाओं के आदान-प्रदान में उत्पादक से उन व्यक्तियों तक ,उन स्थान व् समय पर तथा उस कीमत पर उपलब्ध कराने से है जो वे चुकाने को तैयार हो और जिन्हे उसकी जरुरत हो।
          मानव संसाधन (Human resource)- मानव संसाधन प्रबंधन को सुनिश्चित करता है उद्यम में विभिन्न प्रकार के कार्यो को करने का हुनर रखने वाले लोगो की उपलब्धता को सुनिश्चित करता है।


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व्यवसाय से लाभ अर्जित करना 
          व्यवसाय करने का उदेश्य लाभ अर्जित करना है यदि व्यवसाय में लाभ नहीं होगा तो वह अधिक समय तक टिका नहीं रह सकता।  व्यापारी वस्तुओं या सेवाओं की लागत को काम करके  या विक्रय मात्रा को बढ़ाकर अधिक लाभ अर्जित करते है।
       
व्यापार में होने वाले हानि  
          कोई भी व्यवसाय हानि से नहीं बच सकता है यदि व्यवसाय में लाभ होगा तो यकीनन कही न कही हानि भी होगा।  व्यवसाय में होने वाली हानि जैसे - उपभोक्ताओं की पसंद बदलना, उत्पादन स्थितियों में बदलाव , कार्य स्थल पैर हड़ताल या तालेबंदी, बाज़ार पर्तिस्पर्धा (Competition), आग, चोरी, दुर्घटना, प्राकर्तिक आपदा आदि ऐसे कारण है जिस कारण व्यवसाय में हानि होती है।
           व्यवसाय को शुरू करने के लिए पूँजी की जरुरत तो होती है लेकिन निवेश की गई पूंजी पर लाभ होगा यहाँ निश्चित नहीं होता है या फिर यहाँ भी हो सकता की लाभ कमाने में, समय अधिक लग जाए।

व्यवसाय, पेशा और रोजगार में अंतर
         
       
           ऊपर की तस्वीर से आप समझ सकते है की व्यवसाय, पेशा और रोजगार में क्या अंतर होता है।

व्यवसाय दो प्रकार का हो सकता है। 
१-उद्योग
२-वाणिज्य

उद्योग - इस में वास्तु का निर्माण करना आता है जो भी कोई किसी भी प्रकार की वस्तु को बड़ी मात्रा में बनता है ऐसे कार्य को उद्योग कहा जायेगा।
वाणिज्य- वास्तु के आदान प्रदान में या उसे किसी के पास पहुंचने या किसी भी वास्तु को निर्माण स्थान से उस व्यक्ति तक पहुंचने में जिसे उसकी आवस्यकता है जो भी क्रिया की जाती है वाणिज्य के अंतर गत आती है


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