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धोखेबाज सोनार new story in hindi

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नोट - "वीडियो देखने के स्थान पर पढ़ने से आपके मस्तिक का विकास अधिक तेज़ी से होता है। "

इस story से आप सीखेंगे की यदि आप किसी के साथ अच्छा करेंगे तो अंत में आप के साथ भी अच्छा ही होगा। 

बहुत समय पहले एक ब्राम्हण राम शर्मा और उसकी पत्नी रहते थे। उनका जीवन बहुत ही मुश्किल था। दो वक्त का भोजन भी उनको मुश्किल से मिलता था।


पत्नी बार बार राम शर्मा को कुछ काम करने के लिए कहती, लेकिन राम शर्मा कभी अपने नसीब का रोना रोता और कभी बाहर जा कर काम करने की मुसीबतो को बता कर बात को टाल देता।

एक दिन पत्नी ने राम शर्मा को बहुत बुरा भला कहा। जिस कारण राम शर्मा ने बाहर जा कर काम करने का निश्चय किया। अगले दिन सुबह होते ही वो काम की खोज में चल दिया।




चलते चलते वो एक जंगल में जा पहुंचा। उसे अब प्यास लग रही थी उसको पास में ही एक कुआ दिखाई दिया।

जब राम शर्मा ने कुए में देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। कुए में पानी नहीं था। कुए के अन्दर घास उगी हुई थी।  कुए के अन्दर एक शेर , एक बन्दर , एक साप और एक मनुष्य था।




शेर ने राम शर्मा से कहा मुझे बचाओ। एक जीवन बचाना महान कार्यो में से एक है।

राम शर्मा ने कहा - यदि मेने तुम्हे बचाया तो तुम ही मुझे खा जाओगे।

शेर ने कहा- नहीं, में तुम्हे नहीं खाऊंगा। मेरी जान बचा लो।

राम शर्मा ने सोचा - जंगल में भूखे प्यासे मरने से अच्छा है किसी के जान बचते हुआ मरना।  ये सोच कर राम शर्मा ने शेर को बहार निकल लिया।
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बन्दर ने भी इस प्रकार प्राथना की और राम शर्मा ने उसे भी बहार निकल लिया।

साप ने भी राम शर्मा को डंक न मारने का विश्वाश दिलाया जिस के बाद राम शर्मा ने उसे भी बहार निकल लिया। साप ने बाहर आते ही कहाँ यदि कभी आपको मेरी जरुरत पड़े तो बस याद कीजियेगा। में वह पहुँच जाउंगा। 

बाहर आने के बाद तीनो ने राम शर्मा को कहाँ- कभी हमारे घर आइये आपकी महमान नवाजी कर के हमें बहुत ख़ुशी होगी। जाने से पहले तीनो ने कुए में फसे सुनार से राम शर्मा को सावधान किया और कहा वो एक बहुत ही धूर्त व्यक्ति है उस से सावधान रहना ये कहा कर तीनो वहा से चले गए।

कुए में फसे सुनार ने कहा - मुझे बचाइये। मेरा जीवन अब आप ही बचा सकते है। राम शर्मा ने तीनो की बातों को अनदेखा कर उस सुनार को भी बाहर निकल लिया। सुनार ने राम शर्मा का धन्यवाद किया। और वहा से चला गया। 

राम शर्मा अब काम की खोज में आगे चल दिया। कई दिनों तक उसे कोई काम नहीं मिला। अंत में हार कर राम शर्मा ने वापस जाने का फैशला कर लिया। 

वापस जाते वक्त उसे बन्दर का निमंत्रण याद आया। वो बंदर के पास गया। बंदर बहुत खुश हुआ। बंदर ने उसे मीठे फल खिलाये। फल खा कर उसने बंदर से शेर की गुफ़ा पूछी। बंदर ने उसे शेर की गुफा का रास्ता बता दिया।

शेर भी राम शर्मा को देख बड़ा खुश हुआ। शेर ने राम शर्मा को खूब हीरे जवहरत दिए। शेर ने बताया एक राज कुमार जंगल में आया था। जिसे मार कर मेने उसके जवाहरत यहाँ रख लिए. ये मेरे किसी काम के नहीं है तुम इनको ले जाओ। 

हीरे जवहरत पाकर राम शर्मा बहुत ख़ुश हुआ। हीरे जवहरत को बेचने के लिए राम शर्मा सोनार के पास गया। 

सोनार ने उन जवाहरात को पहचान लिया और राजा को जा कर दिखा दिए।


राजा ने उन को तुरंत पहचान लिया। 

सुनार ने राजा को बताया की ये एक ब्राम्हण उसके पास बेचने के लिए लाया था। सायद उस ने राजकुमार को मर कर ये उन से ले लिए है 

ये सुन कर राज गुस्स हो गया। और राजा ने राम शर्मा को फाशी की सजा दे दी। राजा के आदेश पर राम शर्मा को करा गार में डाल दिया गया।  

कारगर में राम शर्मा ने साप को याद किया और साप राम शर्मा के सामने आ गया। साप को पूरी बात पता चली 

साप बोला - हम सब ने तुम्हे सावधान किया था। लेकिन कोई बात नहीं मेरे पास एक योजना है। रोज सुबहः रानी बाग़ में फूल लेने जाती है में उन को डंक मरूंगा , जिसका इलाज कोई न कर पायेगा सिर्फ तुम ही उसे ठीक कर सकोगे। 

सुबह जब रानी को साप ने कटा तो उनका इलाज कोई न कर पाया।

रानी का बचना अब मुश्किल लग रहा था। तभी राजा के पास एक सैनिक आ कर बोला। कारगर में बंद व्यक्ति रानी को ठीक करने का दवा कर रहा है। 

राजा के आदेश पर राम शर्मा को रानी के पास लाया गया। राम शर्मा के हाथ लगते ही रानी ने अपनी आखे खोल दी जिसे देख सभी को समझ आ गया की यहाँ राजकुमार को नहीं मर सकता।

राम शर्मा ने राजा को सारी बात बताई। राजा को राजकुमार की मोत का सुन कर बड़ा दुःख हुआ।

राजा ने सुनार को दंड दिया और राम शर्मा को उपहार में बहुत सारा धन।

राम शर्मा ने राजा से आज्ञा ली और घर की और चल दिया।  

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कहानी पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया , आपका दिन शुभ हो।

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