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दुनिया का सबसे अच्छा उपहार The world's best gift hindi story

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                कहानी में आप जानेगे की सबसे अच्छा उपहार क्या होता है।

            एक घर जिसे सजाया गया है। लॉन में कुछ कुर्सियां लगी हुई है। बहुत-से बच्चे और स्त्री-पुरुष रंग-बिरंगे वस्त्र पहने हुए उपस्थित है। साम का समय है पिंटू की वर्षगाठ संपन्न होने वाली है पिंटू और उसके पिता जी दरवाजे पर खड़े हो के  का स्वागत कर रहे है। सभी कुछ न कुछ उपहार ले के आये है। 

द्वार के बाहर एक कोने में खड़ा लड़का यहा सब देख रहा है 

पिंटू - अब तो सब मेहमान आ चुके पापा। आइये , चले। 

पापा - अभी तुम्हारी मम्मी  की सहेली शारदा कहाँ आई है। 

( तभी सामने से एक बढ़िया साडी पहने एक महिला आती है यही शारदा है )

पिंटू -  नमस्ते आंटी। 

शारदा - नमस्ते, नमस्ते  पिंटू जी। इतने बड़े , इतने बड़े जितना ताड़। 

पापा - तिल का ताड़ मत बनाइये , बहन जी।  अभी तो पिंटू जी तिल  है नन्हा सा तिल। 

शारदा - ( हॅसते हुए ) पर भाई साहब , यहाँ आँख वाला तिल है या लड्डू वाला। 

पापा - ( ठहाका लगते हुए )  जो भी तुम समझो , बहन जी। 

पिंटू - चलो ना आंटी देर हो रही है। 

शारदा - हा-हा  चलो पिंटू साहब जी। 


(   सब लोग सजी हुई मेज के चारो और इकठ्ठा होते है। पिंटू मोमबत्तियाँ बुझात है और केक काटता है। चारो और हैप्पी बर्थडे की आवाज गूंज जाती है। मेहमान खाते हुऐ दिखाई देते है। )

पिंटू - (अपने दोस्तों को)   गुडबाय दोस्तों, फिर मिलेंगे।  

मित्र - ( एक साथ )  गुडबाय, गुडबाय। 

मेहमानों को विदा करके पिंटू दीवार की ओर देखता है उसे कोने में मेले-फटे कपड़े पहने हुए एक बालक खड़ा दिखाई देता है उसकी आयु 10-12 वर्ष के बीच है   )


  1. Advantages of drinking water in hindi पानी के 51 रोचक तथ्य 
  2. Interesting facts of mind in hindi मानव मस्तिष्क के अद्भुत तथ्य 
  3. Differences between women and men in hindi  पुरुष और महिला के बीच अंतर  
  4. कठोर बनो कमजोर नहीं Be tough hindi story
  5. अकबर बीरबल की कहानी hindi story
  6.  निर्णय Decision hindi story 

पिंटू - क्यों भाई तुम यहां कैसे खड़े हो हमसे कोई काम है क्या ?


बालक- नहीं काम तो नहीं है जी, देख रहा था। यह क्या हो रहा है।
पिंटू - क्या देखा तुमने ?

बालक- आज कोई त्यौहार था क्या ? होली दीपावली जैसे।

पिंटू - नहीं भाई त्यौहार नहीं था। मेरी वर्षगांठ थी,12 वीं वर्षगांठ।

बालक- वर्षगांठ क्या होती है जी ?

पिंटू - अरे तुम वर्षगांठ भी नहीं जानते ?

बालक- (सिर हिलाते हुए ) मैं क्या जानू भैया यह भी कोई त्यौहार होता है क्या ?

पिंटू - (हंसते हुए) तुम तो बहुत ही सीधे लगते हो, हर साल जन्मदिन मनाया जाता है ना, तुम्हारा जन्मदिन नहीं मनाया जाता क्या ?

बालक- ( सिर हिलाते हुए )  मुझे नहीं पता।

पिंटू - क्या नाम है तुम्हारा?

बालक- मेरा नाम है जी, घसीटाराम है घसीटू, घसीटू कहते हैं लोग मुझे।

पिंटू -  ( मुंह बनाते हुए ) बड़ा खराब नाम है तुम्हारा, घसीटाराम।
तुम्हें खराब लगता होगा, तुम बड़े आदमी हो ना  पर मां बताती थी, उसका कोई बालक जीता नहीं था तब एक महात्मा के बताने पर मैं पैदा हुआ तब मुझे धरती पर रखकर और राम का नाम लेकर घसीट दिया गया था

पिंटू - इसलिए तुम्हारा नाम घसीटाराम पड़ गया?

बालक-हां भाई जी।

पिंटू - धरती पर रखकर  घसीटने से क्या बालक जी जाते हैं?

बालक- यह तो मुझे पता नहीं जी, पर मैं तो बच गया जी।

पिंटू - तुम्हारे घर बच्चों के टीके विके नहीं लगवाए जाते हैं क्या ?

बालक- कौन से टीके जी? जब मैं घर से निकलता हूं।
तो मां मेरे माथे पर काला टीका लगा देती है।
कहीं कोई नजर न हो जाए।
तुम उसी टीके को कह रहे हो क्या जी?

पिंटू - (  बालक के सीधेपन हंसते हुए )  
अच्छा यह बताओ तुम क्या काम करते हो घसीटाराम?

बालक- मैं घर घर जाकर अखबारों की रद्दी खरीदता हूं।

पिंटू -  रद्दी का क्या करते हो तुम?

बालक- मैं और मां दोनों मिलकर थेलिया बनाते हैं
फिर उन्हें लाला के यहां बेच देते हैं

पिंटू -  तो क्या इसी से तुम्हारा गुजारा चलता है  घसीटाराम?

बालक- हां जी।

पिंटू -  स्कूल नहीं जाते हो तुम?

बालक- स्कूल तो तुम जैसे बच्चों के लिए ही है।
पिंटू जी हमारे लिए नहीं है।

पिंटू -  गलत बात ( हाथ बढ़ाते हुए ) अच्छा,
तुम मुझसे दोस्ती करोगे घसीटाराम?

बालक- दोस्ती तो बराबर वालों से होती है।
पिंटू भाई कहां में और कहां तुम?

पिंटू -  मैं और तुम बराबर तो है। तुम भी 12 साल की,
मैं भी 12 साल का( अबकी बार वह स्वयं हंसता है)
आओ, मेरे साथ आओ मैं तुम्हें अपने जन्मदिन
की मिठाई खिलाऊंगा।

बालक-  नहीं पिंटू भाई, ऐसे नहीं।

पिंटू -  ऐसे क्यों नहीं?

बालक- सब  लोगों ने तुम्हें कोई न कोई उपहार दिया
मैंने तो कुछ दिया ही नहीं मैं कैसे खाऊं?

पिंटू -  बड़े अभिमानी हो। चलो तुम भी कोई उपहार दे दो ना।


बालक- अच्छा, तुम कुछ देर ठहरो।  
मैं अभी घर से लौटकर आता हूँ ।

(बालक तेज-तेज कदमों से जाता हुआ दिखाई देता है)

पापा- (पिंटू की ओर आते हुए) क्यों पिंटू, किससे घुट रही थी, बाहर सड़क पर?

पिंटू-   एक नया मित्र बना है पापा, घसीटाराम।

पापा-(  खींझते हुए) वह  गंदा लड़का, रद्दी वाला?

पिंटू-  वह गंदा लड़का नहीं है पापा, बहुत सीधा सच्चा है।


मम्मी- (  पिंटू के पापा की हां में हां मिलाते हुए)
 हां, हां पिंटू, तुम्हारे पापा ठीक कह रहे हैं  
तुम पढ़ने लिखने वाले बच्चे हो तुम्हारा उसका क्या साथ?

पिंटू- पर मम्मी, मैंने तो उससे वादा किया है।
मैं उसे अपने जन्मदिन की बहुत सारी मिठाई दूंगा।

पापा-  ठीक है, ठीक है। मिठाई तुम उसे दे देना,  
पर वह तो चला गया।

पिंटू-  चला नहीं गया पापा !  वह तो उपहार लेने गया है।
मुझे देने के लिए।

मम्मी-  उपहार लेने गया है?

पिंटू-  हां मम्मी !  वह कहता था,
मैं तब तक मिठाई नहीं खाऊंगा, जब तक
उपहार नहीं दूंगा। मुझे सभी ने
उपहार दिया है ना ?

पापा-  तो क्या तुम उस गरीब बच्चे से उपहार लोगे?

पिंटू-  इसमें बुरा क्या है पापा?

मम्मी-  तुम्हें इसमें कुछ भी बुरा नहीं लगता है, पिंटू?

पिंटू-  नहीं मम्मी।

मम्मी- ओहो ! तुम्हें क्या हो गया है,  बेटे !

पापा-  अच्छा भाई, अब तकरार बंद करो।
वह आएगा तुम्हारा नया मित्र घसीटाराम।
तो तुम उसे डटकर
मिठाई खिलाना, पर उससे कोई उपहार आदि मत लेना,
समझे?

पिंटू-  वह कुछ लाएगा तो मैं कैसे इंकार  करूंगा, पापा?

मम्मी-  इंकार करने में कौन सी मेहनत करनी पड़ेगी,  बेटे?

पिंटू-  जितने लोग उपहार लाए थे मम्मी, उनमें से किसी को मैंने,  
आपने, पापा ने मना किया है क्या ?
फिर उसे क्यों मना करूंगा मैं?

मम्मी-  उनकी बात और थी बेटे, इसकी बात और है।

( घसीटाराम तेज-तेज कदमों से चलता हुआ पिंटू के
घर की ओर आता दिखाई देता है)

घसीटाराम- ( मुख्य द्वार में प्रवेश करते हुए)  लो पिंटू भाई,
मैं तुम्हारे लिए एक छोटा सा तोहफा लाया हूं।

पिंटू- ( हाथों में एक छोटे से पौधे को देखते हुए)  
यह क्या लाए हो, घसीटाराम?

घसीटाराम-  तुम कुछ नहीं करोगे पिंटू भाई,
 मैं इसे तुम्हारे आंगन में लगा देता हूं
 देखना यह धीरे-धीरे बढ़ जाएगा।

पिंटू-  कैसे लगाओगे  इसे?

घसीटाराम-  खुरपी भी लाया हूं। पिंटू जी कभी तुम्हारे घर ना
हो खुरपी। बड़े घरों में बाजा होता है। खुरपी नहीं होती ना।

( घसीटाराम मुख्य द्वार के निकट,
चार दिवारी से कुछ हटकर। जमीन खोदकर
उसमें पौधा लगाता हुआ दिखाई देता है।
पौधा लगाकर वह अपने हाथ झाड़ता है।
फिर पास में लगी टोटी खोलकर हाथ धो लेता है)

पिंटू- ( भीतर से मिठाई का डब्बा लाते हुए) लो घसीटाराम , मिठाई खाओ।

घसीटाराम- ( मिठाई का डिब्बा लेते हुए)  तुम इस पौधे की चिंता मत करना पिंटू भाई। मैं रोज या दूसरे दिन आकर इसे पानी दे जाया करूंगा 5 साल में यह पूरा एक पेड़ बन जाएगा, देखना।


(घसीटाराम चला जाता है। पिंटू, उसकी मम्मी और पापा पौधे के पास खड़े बातें कर रहे हैं)


पापा-  मन भी किसी मूर्ख पर आया है, अपने पिंटू  बेटे का !

मम्मी-  कुछ नहीं जुड़ा तो आम का पौधा ही उखाड़ लाया घर से !

पिंटू-  पर मम्मी,  घसीटाराम का प्रेजेंट सबसे बढ़िया है, यह तो आप मानोगे।

मम्मी-  वह कैसे? इतने अच्छे-अच्छे कपड़े, पेन, शोपीस सब लोग लाए, वे बढ़िया नहीं है? यह मरा आम का पौधा बढ़िया है, तुम्हारे लिए।

पिंटू-  हां मम्मी,  यह प्रेजेंट तो नष्ट हो जाएंगे, आज नहीं तो कल, पर यह पौधा तो कभी समाप्त नहीं होगा।

पापा-  समाप्त नहीं होगा?

पिंटू-  हां पापा !  5 वर्ष में यह पूरा पेड़ बन जाएगा  फिर उस पर फल आएंगे, मीठे-मीठे। घसीटाराम का उपहार तो जीते जी चलेगा।

पापा-  अरे मूर्ख, कब दादा लेगा, कब पोता बरतेगा ? ( हंसते  हैं।)

पिंटू-   पोता नहीं पापा !  मैं और आप भी भरतेगे। इस पेड़ के फल में और आप खाएंगे।
( पिंटू पौधे पर पानी  छिड़कता दिखाई देता है)

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