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5 नई कहानियाँ 5 new short stories in hindi


नमस्कार दोस्तों आपका इस ब्लॉग में स्वागत है


नोट - "वीडियो देखने के स्थान पर पढ़ने से आपके मस्तिक का विकास अधिक तेज़ी से होता है। "


अमीर बने रहने का उपाय



सुरेश और प्रताप दो मित्र थे। दोनों निर्धन थे।
इसलिए वे दोनों बहुत दुखी थे। एक दिन वह आपस
में बातें कर रहे थे। सुरेश कहने लगा,” कितना अच्छा
हो कि मेरे पास खूब सारा धन हो जाए।
मेरा भाग्य बदल जाए और मैं मौज में रहूं। ”





कुछ देर बाद प्रताप बोला,” भाई, मैं तो मेहनत पर
भरोसा करता हूं। मेरा दृढ़ विश्वास है। कि मेहनत का
फल मनुष्य को अवश्य मिलता है। ”

कुछ दिन बाद सुरेश कुए से जल भरकर लौट रहा था।
कि उसका पैर जमीन में धंस गया। जमीन पोली थी,
उसे शक हुआ। उसने जमीन खोदकर देखा तो उसमें उसे,
सोने की मोहरों से भरा हुआ एक घड़ा दिखाई दिया।
घड़ा पाकर सुरेश  बहुत खुश हुआ। वह बहुत धनी
बन गया कुछ ही दिनों में वह एक बड़े बंगले में
ठाट बाट से रहने लगा।

दूसरा मित्र प्रताप एक दिन नदी के किनारे-किनारे
जा रहा था। अचानक उसने एक बच्चे को नदी में
डूबता हुआ। देखा उसने फौरन नदी में कूदकर
उसकी जान बचाई। बच्चा एक जमीदार का था।
जमीदार प्रताप से बहुत खुश हुआ। उसने उसे खेती
करने के लिए थोड़ी सी जमीन और दो बैल दे दिए।

प्रताप ने मेहनत करके अपने खेतों को बढ़ा लिया
उसकी मेहनत से जमीदार बहुत खुश हुआ। उसने उसे
अपने साथ अपने घर पर ही रख लिया प्रताप अब सुख
से रहने लगा।

उधर सुनील धन पा कर आलसी हो गया था मैं कुछ मेहनत तो करता नहीं था, बस बैठे-बैठे  धन खर्च करता रहता था इसका फल यह हुआ कि धीरे धीरे वह अपना सारा धन गवा बैठा

यदि कभी आपको ढेर सारा धन प्राप्त हो तो आप
उसका उपयोग धन कमाने के लिए कीजिए।
जिससे कि  वह धन सलामत रहे और आप उस धन
के द्वारा कमाए गए धन पर, अपना जीवन बीता सके
और उस धन को और  बढ़ा सकें

  1. दुनिया का सबसे अच्छा उपहार The world's best gift hindi story 
  2. Advantages of drinking water in hindi पानी के 51 रोचक तथ्य 
  3. Interesting facts of mind in hindi मानव मस्तिष्क के अद्भुत तथ्य 
  4. Differences between women and men in hindi  पुरुष और महिला के बीच अंतर  



चाँदी की चाबी


बहुत पहले की बात है। एक दिन एक यात्री बहुत दूर से थका-हारा आया और सराय के द्वार पर  पहुंचा। रात का समय हो गया था। अतः सराय का द्वार बंद हो चुका था। कई बार दरवाजा खटखटाने के बाद अंदर से आवाज आई,” दरवाजे की चाबी खो गई है। अगर चांदी की चाबी अंदर डालो तो दवा द्वार खुल जाएगा। “



     यात्री समझ गया की सराय का रखवाला लोभी है। उस समय चांदी के सिक्के चला करते थे। उसने फौरन जेब से चाँदी के कुछ सिक्के निकालकर दरवाजे के नीचे से अंदर सरका दिए। अब क्या था, द्वार उसी समय खुल गया


 अंदर आकर यात्री ने जेब से एक सिक्का निकाल कर रखवाले को दिया और कहां,” बाहर पेड़ के नीचे मेरा थैला रह गया है। तुम जाकर उसे उठा लाओ। ”


रखवाला थैला लेने बाहर गया। परंतु वहां कोई थैला ना था। चारों ओर देख कर वह वापस लौट आया। पर यह क्या, सराय का दरवाजा अंदर से बंद था। उसने दरवाजा खटखटाया, पर व्यर्थ। दरवाजा न खुला बार-बार दरवाजा खटखटाए जाने पर अंदर से यात्री ने उत्तर दिया,” भाई, दरवाजे की चाबी नहीं मिल रही। अगर चांदी की चाबी अंदर दो तो शायद दरवाजा खुल जाए।” रखवाला तो परेशान हो चुका था।



यह सुनकर वह अपनी गलती समझ गया यात्री के हुए सिक्के उसने दरवाजे के नीचे से सरका दिए यात्री ने दरवाजा खोल दिया यात्री के सामने पहुंचकर रखवाले ने उस से क्षमा मांगी और भविष्य में कभी ऐसी गलती न करने का वचन दिया

इस तरह जैसे को तैसा व्यवहार करके यात्री ने रखवाले को अच्छा सबक सिखा दिया



₹10 वाला तोता और ₹50 वाला तोता

एक बहेलिए के पास दो तोते थे। 

वह उन दोनों को बेचना चाहता था।

कई ग्राहक आए, उनका मूल्य पूछा।

बहेलिए ने एक का मूल्य ₹10 और दूसरे का मूल्य
₹50 बताया। खरीदारो ने बहेलिए से मूल्य के इस अंतर
का कारण पूछा। हर बार बहेलिए का एक ही उत्तर
था,” इन दोनों को अपने साथ ले जाइए तभी
इनका अंतर मालूम हो सकेगा।”


अंत में एक धनी ग्राहक आया और दाम देकर दोनों
को अपने साथ ले गया। उसने दोनों को दो
अलग-अलग पिंजरे में रखा और पिंजरों को अलग-अलग
स्थान पर टांग दिया। दिन बीत  गया।

अगले दिन सुबह धनी उठा तो पहले ₹50 वाले तोते के
पास गया। उसे देखकर तोता मीठी बोली में
बोलने लगा,” आइए, स्वागत! आपका दिन शुभ हो।”
धनी यह सब सुनकर बहुत खुश हुआ।


अब उसे यह जानने की इच्छा हुई कि देखे दूसरा तोता
क्या कहता है? वह उसी समय दूसरे के पास पहुंचा।
पर यह क्या ! यह तोता तो उसे देखते ही चीख-चीखकर
कहने लगा,” अरे, इसे मारो ! लूट लो इसे।”


धनी यह सुनकर क्रोधित हो गया। उसने अपने
आदमियों को इस तोते को मार डालने की आज्ञा दी।


पर तभी पहले वाला तोता बोला,” कृपया
करके इसे मारिए नहीं, यह मेरा भाई है
मैं पहले एक साधु के पास तथा यह एक
डाकू के पास रहता था बुरी संगति के कारण
ही यह अब इस तरह बोलता है”


अब दोनों के मूल्य का अंतर धनी की समझ में आ गया था।
सचमुच जो जैसी संगति में रहता है, वैसा ही बन जाता है


संगती का हमारे जीवन पर बहुत ही अधिक प्रभाव
पड़ता है। अतः मैं आपसे यही कहना चाहूंगा कि अपने
समूह में अच्छे और सच्चे लोगों को रखें।
जिससे कि आप अच्छे और सच्चे बन सके


आप जिस प्रकार के समूह का चयन करेंगे आपका
भविष्य भी उसी प्रकार निर्धारित होगा


संतोष सबसे बड़ा धन है

एक नगर में एक सेठ रहते थे। उनका नाम थाबनारसी दास।

उनके पास बहुत-सा धन था।

वे सब सुविधाओं से पूर्ण शानदार भवन में रहते थे।

परंतु इतने पर भी उनके मन में शांति न थी।

वे अपने नाती-पोतों तक के लिए चिंता करते थे और

उनके लिए बहुत सारा धन जुटाना चाहते थे।

एक दिन नगर में एक संत पधारे।

वे बहुत ज्ञानी और सरल स्वभाव के थे।

अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी कर देते थे

सेठ जी ने उनके विषय में सुना तो मन में उनसे मिलने
की इच्छा जागी।

दूसरे दिन सेठ जी पैदल चलकर संत जी की सेवा में
उपस्थित हुए।

पास पहुंच कर उन्होंने महात्मा जी के चरण छुए और
बैठ गए।

महात्मा जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया,”
तुम्हारी इच्छा पूरी होगी” यह सुनकर सेठ जी खुश हुए।

कुछ क्षण बीतने पर महात्मा जी ने फिर कहा,”
पर इच्छा पूर्ति के लिए तुम्हें एक काम करना होगा।”

सेठ ने पूछा,” मुझे क्या करना होगा महाराज?  
आज्ञा कीजिए। ”

संत ने कहा,” आपके पड़ोस में एक गरीब परिवार रहता है।
आप जाकर पहले उन्हें भोजन दे आइए।”

सेट बनारसी दास आज्ञानुसार तत्काल अपने निर्धन
पड़ोसी के पास गए। वहां जाकर उन्होंने देखा कि

इस परिवार में मां और उसकी एक बेटी थी
दोनों काम में लगी थी।

उन्होंने सेठ की और कोई विशेष ध्यान नहीं दिया।

कुछ देर तक प्रतीक्षा करने के बाद सेठ ने माता
पुत्र से कहा,” मां, मैं आपके लिए भोजन लाया हूं।

मेहरबानी करके इसे ले लीजिए।”

मां ने उत्तर दिया,”  बेटा, आज का भोजन तो मेरे पास है
इसलिए मुझे इसकी आवश्यकता नहीं है।”

“ मां, भोजन की आवश्यकता तो बराबर बनी ही रहती है।
इसलिए  यह कल के लिए रख लीजिए।”

“ कल की चिंता मुझे नहीं। मुझे भगवान पर भरोसा है।
वे ही अवश्य कल भी भोजन जुटाएंगे।"

मां कीबात सुनकर सेठ बनारसीदास खड़े के खड़े रह गए।

उनकी समझ में आ गया की धनहीन होते हुए भी
यह परिवार संतोषी होने के कारण पूर्ण सुखी है।

सेठ जी समझ गए की संतोष सबसे बड़ा धन है।

चिंता चिता के समान है

इसलिए भविष्य की चिंता छोड़ कर भूतकाल की
बातों को भूलकर हमें वर्तमान में जीना चाहिए।

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एकता अनेकता


आकाश में एक कबूतरो का झुंड उड़ रहा था।


अचानक एक कबूतर ने देखा नीचे बहुत से दाने बिखरे हुए थे।


वो चिल्लाया कर कहने लगा कि चलो सभी नीचे चलते हैं। सभी दाने खाएंगे।


तभी एक कपोत को न समझ में आया कि जंगल में यह दाने कहां से आए।


कपोत ने कहा रुको रुको जरा समझो यह एक जाल है।


पर सभी दाना खाने की लालच में नीचे उतर आए और जाल में फस गए।


सभी जाल से मुक्त होने के लिए फड़फड़ाने लगे।


पर जाल के अंदर फसते ही जा रहे थे।


तभी कपोत ने कहा सभी एक साथ उड़ो।


सभी कबूतरों ने साथ मिलकर उड़ना शुरू किया। '



कबूतर आकाश में ऊपर उड़ गए जाल भी साथ में उड़ा ले गए।


शिकारी कबूतरों के पीछे भागता रहा।

कबूतर काफी दूर और ऊचा उड़ गए थे।


अंत में शिकारी ने हार मान कर उनका पीछा छोड़ दिया।


सभी कबूतर उड़कर एक चूहे के पास जा पहुंचे।


चूहा कपोत का बड़ा ही अच्छा मित्र था।


चूहे ने जाल काट कर कबूतरों को आजाद कर दिया।


शिकारी अपने आप को कोसने लगा।


आज कोई शिकार तो मिला नहीं ऊपर से जाल भी हाथ से चला गया।


शिकारी ने देखा की ऊपर एक और कबूतर का झुंड आपस में लड़ रहा है

शिकारी मन ही मन मुस्कराया।


उसने सोचा यह तो आपस में ही लड़ रहे हैं इन्हें पकड़ना आसान है।


शिकारी ने तुरंत जमीन पर दाने बिखेर कर जाल बिछा दिया।


ऊपर लड़ रहे कबूतरों के झुंड में से एक कबूतर नीचे की ओर आने लगा।


उसे देख सभी कबूतर समझ गए कि वह नीचे दाना चुगने जा रहा है।


सभी कबूतर लड़ना छोड़कर उसके पीछे नीचे दाना चुगने के लिए चल पड़े।

सभी कबूतर नीचे आए और जाल में फस गए।

अपनी अपनी जान बचाने के लिए फड़फड़ाने लगे।


लेकिन कोई भी जाल से मुक्त नहीं हो पाया।


उनमें से एक समझदार कबूतर बोला चलो सभी साथ में उड़ते हैं।


यह सुनकर सभी कबूतर साथ में उड़ने लगे।


शिकारी फिर से उनके पीछे भागने लगा कबूतर आकाश में ऊपर की और उड़ चुके थे।


तभी उनमें से एक कबूतर बोला सभी कबूतर पूरब की ओर उड़ो।


तभी दूसरा दबंग कबूतर बोला नहीं, पश्चिम की और उड़ो।


पहला कबूतर फिर से चिल्लाया -नहीं, पूरब की और उड़ो


दबंग कबूतर चिल्लाया-नहीं, पश्चिम की ओर उड़ो।


कबूतरों का झुंड इस प्रकार से दो हिस्सों में बट गया।

आधे कबूतर पूरब की ओर और आधे पश्चिम की ओर उड़ने लगे।


अंत में कबूतरों का झुंड ना ही पूरब की ओर और ना ही पश्चिम की ओर जा सका।


जमीन पर गिरने लगा। अंत में कबूतरों का झुंड जाल सहित जमीन पर गिर पड़ा।


शिकारी खुशी-खुशी उन सभी को पकड़कर अपने साथ ले गया।


यह सारी घटना दूर खड़ा एक व्यक्ति देख रहा था। उसने कुछ देर सोचा और कहा


आपस में यदि मेलजोल हो।
हो जाते हैं सारे काम।
फूट और झगड़ा होने से।
बिगड़ा करते हैं सब काम।


फिर वह भी अपने रास्ते चला गया।



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