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बुद्धिमान लोग हमेशा यह बातें याद रखते हैं क्या आप जानते हैं?

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मस्तिक का विकास अधिक तेज़ी से होता है। "

इस पोस्ट में आपको महान पुरुषों के द्वारा कही गई बातों को जानने का और
उन्हें समझने का मौका मिलेगा। जिसे आप अपने जीवन में ग्रहण कर
एक अच्छा भविष्य बना सकते हैं। आशा करता हूं आप को यह पसंद आएगा

1-सत्संग के बिना विवेक प्राप्त नहीं होता। सत्संग से दुष्ट भी सुधर जाते हैं। --तुलसीदास

2-महान पुरुषों की निंदा करने वाले ही दोषी नहीं,
उसे सुनने वाले भी दोषी होते हैं।--कालिदास

3-एक आचार्य 10 अध्यापकों से श्रेष्ठ है
पिता 100 आचार्यों से तथा माता 1000
पिताओ से श्रेष्ठ है।--मनु

4-थोड़ा पढ़ना ज्यादा सोचना कम बोलना ज्यादा सुनना यही बुद्धिमान बनने के उपाय है।--रविंद्र नाथ टैगोर

5-प्रेम सबसे करो, विश्वास कुछ पर करो, बुरा किसी का मत करो।--प्रेमचंद

6-धन और अन्य के लेन-देन में विद्या प्राप्त करने
और भोजन करने में जो लज्जा करता है
वह दुखी रहता है।--चाणक्य

7-बिना चिंतन का अध्ययन तो बस परिश्रम का
व्यर्थ जाना है।--कन्फ्यूशियस

8-एक आज दो कल के बराबर है।--बेंजामिन फ्रैंकलिन

9-यह मत सोचो कि अवसर तुम्हारे
दरवाजे पर दोबारा दस्तक देगा।--कम्फर्ट

10-एक व्यर्थ जीवन ही शीघ्र मृत्यु है।--गेटे

11-अपनी बुराइयों को अपने से पहले मर जाने दे।--बेंजामिन फ्रैंकलीन

12-विद्या से विनय की प्राप्ति होती है,विनय से योग्यता,
योग्यता से धन, धन से धर्म और धर्म से
सुख प्राप्त होता है।--हितोपदेश

13-अच्छा मित्र अपने मित्र को पापों से दूर रखता है
उसे हितकारी कामों में लगाता है
उसकी गुप्त बातों को छिपाए रखता है
और उसके गुणों को उजागर करता है
आपत्ति में उसका साथ नहीं छोड़ता और
आवश्यकता पड़ने पर उसे धन भी देता है।--भर्तृहरि

14-मानव जीवन में लगन बड़े महत्व की वस्तु है
जिसमें लगन है, वह बूढ़ा भी जवान है, जिसमें लगन नहीं है
वह जवान भी मृतक है।--प्रेमचंद

15-अधिक लोभ नहीं करना चाहिए, साथ ही साथ
सामान्य लोभ का त्याग भी कर देना चाहिए।--विष्णु शर्मा

16-संपत्ति उद्योगी पुरुष सिंह को ही प्राप्त होती है। अर्थात धन उसी मनुष्य को प्राप्त होता है जो उसे बढ़ाना जानता हो।--भृतहरि

17-संसार की सभी वस्तुओं में विद्या सबसे श्रेष्ठ है
न इसे चुराया जा सकता है
और न यह प्रयोग करने पर नष्ट होती है।--हितोपदेश

18-गुणी व्यक्ति से की गई याचना भले ही निष्फल चली जाए, इसमें कोई हानि नहीं, अधर्मी व्यक्ति से की गई याचना का सफल होना भी उचित नहीं है।--कालिदास

19-उगते समय सूरज का रंग तांबे जैसा होता है और
समय भी। महान व्यक्ति संपत्ति और विपत्ति
दोनों के समय एक जैसे रहते हैं।--भारवि

20-कुछ लोग विशेष अवसर मिलने की प्रतीक्षा
किया करते हैं, किंतु वास्तव में कोई अवसर छोटा
या बड़ा नहीं होता। छोटे से छोटा अवसर का प्रयोग करने से,
अपनी बुद्धि को उसमें जुटाने देने से वही अवसर
बड़ा हो जाता है।--स्वेट मार्डेन

21-दूसरों को उपदेश देने में कुशल लोगों तो बहुत से होते हैं,
किंतु और उपदेशों पर स्वयं आचरण करने वाले लोग
विरले ही होते हैं।--तुलसीदास

22-प्रत्येक व्यक्ति को अपनी उन्नति से ही संतुष्ट नहीं
रहना चाहिए, किंतु सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति
समझनी चाहिए।--स्वामी दयानंद

23-कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है,
फल में नहीं फल की इच्छा त्याग कर निरंतर
कर्म करो।--गीता

24-रत्न किसी को नहीं खोजता ,
दूसरे लोग ही उसे खोजते हैं।--कालिदास

25-तुम्हें मानवता पर से विश्वास नहीं खोना चाहिए।
मानवता एक सागर है, यदि सागर की कुछ बूंदें गंदी है।
तो इससे सागर गंदा नहीं हो जाता।--महात्मा गांधी

26-प्रतिभा का पोषण एकांत में होता है,चरित्र का निर्माण
संसार के तूफानी आघातों के बीच होता है।--गेट

27-जैसे ही( दान देकर ) बटुआ खाली कर दिया जाता है
ह्रदय (संतोष और आनंद से ) भर जाता है।--विक्टर ह्यूगो

28-कायर अपनी मृत्यु से पहले अनेक बार मरते हैं,
वीर अनेक बार नहीं, केवल एक बार ही मरते हैं।
--शेक्सपियर

29-यहाँ महत्वपूर्ण नहीं है कि हम कितने लंबे समय तक
जीवित रहते हैं, महत्वपूर्ण यह है कि हम किस प्रकार
जीवन बिताते हैं।--बेली

30-विनम्रता सभी गुणों की आधारशिला है। --कन्फ्यूशियस

31-अपने अज्ञानी होने का बोध होना, ज्ञान की ओर
बढ़ने का महत्वपूर्ण कदम है।--डिजरायली

32-पुस्तकों का मूल्य रत्नों से अधिक है, क्योंकि रत्न बाहरी चमक दमक दिखाते हैं जबकि श्रेष्ठ पुस्तक के अंत करण को उज्जवल करती हैं। --महात्मा गांधी

33-हवा के साथ धूल आकाश में ऊपर चढ़ जाती है
किंतु जल का संग पाकर वही धूल
कीचड़ में मिल जाती है।--गोस्वामी तुलसीदास

34-दुनिया में प्रसन्न रहने का एक ही उपाय है। कि अपनी आवश्यकताएं कम करो। --महात्मा गांधी

35-निंदा करने वाले को अपने पास बसा लो। वह साबुन और पानी के बिना ही तुम्हारे स्वभाव को निर्मल कर डालेगा।-- कबीर

36-अपने मन के दुख को अपने मन में ही छुपा कर रखो। पता चलने पर कोई तुम्हारा दुख बाँटेगा नहीं, उल्टे उसके बारे में सुनकर लोग तुम्हारा उपहास करेंगे।--रहीम

37-मैं सब प्राणियों को मित्र की दृष्टि से देखूँ।--यजुर्वेद

38- मनुष्य ही परमात्मा का साक्षात परम मंदिर है, इसलिए इस साकार देवता की पूजा करो।--विवेकानंद

39-नकल ऊपरी बातों की हो सकती है, हृदय कि नहीं। पर हृदय पहचानने के लिए ह्रदय चाहिए, चेहरे पर दो आखो से काम नही चल सकता।--आचार्य रामचंद्र शुक्ल

40- हम उपदेश सुनते हैं मन भर, देते हैं टनभर, पर ग्रहण करते हैं कनभर।--अलनर (अर्थात हम उपदेशों को तभी तक सुनते हैं जब तक हमारा मन नहीं भरता और यदि अगर किसी को उपदेश देने की बारी आई तो हम दुनिया भर का ज्ञान दे देते हैं पर जब उस उद्देश्य या कही गई बात पर अमल करना अमल करने की बात आती है तो हम उसे बहुत ही कम मात्रा में ग्रहण कर पाते हैं या अपने ऊपर अमल कर पाते हैं)
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